Monday, 14 May 2018

नर्रा  नर्रा  मैं  हार   गओ
मोरी  बात  सुनत  नईंया
मनकी बात कहत नईंया

जबसें आओ हे खैतन सें
कठवा बैला लय जौतन सें
ऊंगो  ऊंगो  जो  बैठो  हे
पैले  जैसौं  लगत  नईंया
मनकी बात कहत नईंया

हफ्ता भर में ब्याव मोडी को
सूत चुकाने हे करोढी को
खैतों से कछु नई निकरो
पानी टेम पे गिरत नईंया
मनकी बात कहत नईंया

खून पसीना एकई करके
दिनई रात  देखई  करके
कछु फसल जो हाथे आई
मंडी में भाव मिलत नईंया
मनकी बात कहत नईंया

भीड़ लगी काये खोरन में
बैठे  रोबे  सब  दोरन  में
ओके घरे आफत आ गई
बेवजे कोऊ  मरत नईंया
मनकी बात कहत नईंया

अर्थी उठ रई फिर किसान की
दुनिया  समझे  अनजान की
जो  हालत  में  हम  रेत  हे
ओ  में   कोऊ  रहत  नईंया
मनकी बात  कहत  नईंया

का अनहोनी जा होन लगी
रती मईया अब रोन लगी
जैंसौ दर्द किसान सहत हे
बैंसौ दर्द कोऊ सहत नईंया
मनकी बात कहत नईंया

नर्रा  नर्रा    मैं  हार   गओ
मोरी    बात  सुनत  नईंया
मनकी  बात  कहत  नईंया

"जय कुमार "25/05/18

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