मुझे वक्त के हाथों में सौंपता रहा । जहर मिली मुहब्बत वो परोसता रहा । साथ चलने को खड़ा मैं होता रहा , मेरे जज्बे को खंजर वो खौंपता रहा ।।
"जय कुमार"
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