आंख से आंसु निकलता क्यों है
दिल में दर्द ये पलता क्यों है
कसमें वादों का मौसम तेरा
वक्त के साथ बदलता क्यों है
बन गया पत्थर दिल हरजाई
आज मोम सा पिगलता क्यों है
मुझसे जब ताल्लुक ही नहीं
मेरी गलि से गुजरता क्यों है
कल खाख में जब मिलना तय है
मन बंदर सा उछलता क्यों है
जय कुमार
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