मनोहर थारी मुरली मीठा राग सुनाये । मोहन मारो मन तोहे देख देख मुस्काये । थारी दीवानी मैं हो गई कान्हा मोरे , मनमोहन थारी मूरत मनईं में वसाये ।।
"जय कुमार"
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