तीली इसकी हो या उसकी हो ,
घर तो अपना ही जलता रहा है !
चोट सिर पर लगे या छाती पर ,
लहु अपना ही निकलता रहा है !
राम न बदले रहीम न बदले ,
गीता और कुरान भी न बदले !
इंसान बदलने का सिलसिला ,
यहां सदियों से चलता रहा है !!
"जय कुमार"
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