Saturday, 11 March 2017

तीली इसकी  हो या  उसकी हो ,
घर तो अपना ही जलता रहा है !
चोट सिर पर  लगे या छाती पर ,
लहु अपना ही निकलता रहा है !
राम  न  बदले   रहीम  न  बदले ,
गीता और  कुरान  भी  न बदले !
इंसान  बदलने   का  सिलसिला ,
यहां  सदियों  से  चलता  रहा है !!

"जय कुमार"

No comments:

Post a Comment