जिंदगी जिंदादिली से तब ही जीता हूँ जाम जब तलक मैं बेहिसाब पीता हूँ रंज से दोस्ती हुई खुशी से बैर मेरा जख्म फूलों ने दिये मैं उनको सींता हूँ
"जय कुमार "
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