बेमुरव्वत तेरी तस्वीर , जला न पाया । दिल के बाग में , फूल दूसरा ,खिला न पाया । ख्वावों में रोज हम तेरे , अक्स से मिलते , मुहब्बत को तेरी , आज तक , भुला न पाया ।।
"जय कुमार"
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