कुम्हार का दीपक ही लेना , रखना मान मजदूर का | मेहनताना उनको देना , मिट्टी के कोहिनूर का | देश धर्म की बात चली है , वक्त जागने आया है , दीप जला के दुख हर लेना , दिवाली पर मजबूर का ||
"जय कुमार"
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