सुकून की चाह करते रहे
गुनाह पे गुनाह करते रहे
मुकम्मल जिंदगी के लिए
जिंदगी तबाह करते रहे
सीरत मैली रही जिनकी
सूरत पर वाह करते रहे
आंधियाँ उड़ा गई घरौंदा
आह भर निबाह करते रहे
मासूम बच्चे से मिल लगा
रब से गुमराह करते रहे
"जय कुमार"08/10/16
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