Tuesday, 4 April 2017

ख्वाव  में फिर ,  सुला   गया  कोई
मुझे  मुझ   से ,  मिला   गया  कोई

आखरी साक पर चोट  कि  उसने
अंदर  से फिर  , हिला  गया   कोई

रंग   रूप   की   दौलत   छुडा   दी
दिल को दिल से , मिला गया कोई

तकदीर    का   लिखा   पडू    कैंसे
खुदका  लिखा , पडा   गया    कोई 

जय  रोज    ही   दौड़ता   रहा     है
कैसे  चलूं   ,   सिखा    गया    कोई

"जय कुमार"





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