ख्वाव में फिर , सुला गया कोई
मुझे मुझ से , मिला गया कोई
आखरी साक पर चोट कि उसने
अंदर से फिर , हिला गया कोई
रंग रूप की दौलत छुडा दी
दिल को दिल से , मिला गया कोई
तकदीर का लिखा पडू कैंसे
खुदका लिखा , पडा गया कोई
जय रोज ही दौड़ता रहा है
कैसे चलूं , सिखा गया कोई
"जय कुमार"
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