रात सो गयी दिन,,,,,, जग जायेगा
तम दूर तलक अब ,,,भग जायेगा
खैरियत पूंछ ले ,,,,,,अपनी आपसे
दिल तेरा गमों को ,,,,,तज जायेगा
बुझने लगे भरम का,,, दीपक तब
जीवन पर ताला,, ,,, लग जायेगा
मन के तम को सुला भरोसा जगा
दामन वागों सा,,,,,,,,,, सज जायेगा
सुराक को खामियां न समझ यार
धुन बन बांसुरी सा,,,,बज जायेगा
"जय कुमार "06/08/16
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