Saturday, 20 August 2016

अरमान हमारा ,,,,,,रूठ गया !
आश का वह भरम टूट गया !!

ह्रदय में ,,,,,,,,,,,,खामोशी छाई !
भावों का दरिया,, सूख गया !!

खड़ा हाथ में ,,,तलवार लिए !
मानवता बंधन,,,,टूट गया !!

वासनाओं कि ,,,,आँधी आई !
रिश्तों का भरम,, ,टूट गया !!

वक्त का कैंसा ,,पड़ाव आया !
इंसान को इंसान ,,लूट गया !!

अनाचार के ,,,,,,मंजर देखके !
साहस का बाँध ,,,,,फूट गया !!

खामोश हुआ ,जीवन स्पंदन !
साँसो से ह्रदय ,,,,,,,,रुठ गया !!

"जय कुमार"

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