अरमान हमारा ,,,,,,रूठ गया !
आश का वह भरम टूट गया !!
ह्रदय में ,,,,,,,,,,,,खामोशी छाई !
भावों का दरिया,, सूख गया !!
खड़ा हाथ में ,,,तलवार लिए !
मानवता बंधन,,,,टूट गया !!
वासनाओं कि ,,,,आँधी आई !
रिश्तों का भरम,, ,टूट गया !!
वक्त का कैंसा ,,पड़ाव आया !
इंसान को इंसान ,,लूट गया !!
अनाचार के ,,,,,,मंजर देखके !
साहस का बाँध ,,,,,फूट गया !!
खामोश हुआ ,जीवन स्पंदन !
साँसो से ह्रदय ,,,,,,,,रुठ गया !!
"जय कुमार"
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