Wednesday, 31 August 2016

कुर्सी दिल्ली की चुप रहती है , नाग निकलते हैं |
दूध   हमारा  पी  पी  करके  ,  जहर  उगलते  हैं | भारत  माता  के  विरोध  में   ,    नारे   लगते   हैं |
फूलों  के   बागों   में  आकर  ,   शूकर  पलते  हैं ||

"जय कुमार"

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