कुर्सी दिल्ली की चुप रहती है , नाग निकलते हैं | दूध हमारा पी पी करके , जहर उगलते हैं | भारत माता के विरोध में , नारे लगते हैं | फूलों के बागों में आकर , शूकर पलते हैं ||
"जय कुमार"
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