दिल्ली के दरबारो की क्यों ,,,,,, अब कोई लिखता नहीं सत्तर बर्ष से सपने दिखाते ,,,,,,,,सत्य तुमे दिखता नहीं वादे और इरादे इनके ,,,,,,,,,,, लगते नदी के दो साहिल पैकिंग कितनी सुंदर करलो , सदियों झूठ बिकता नहीं
"जय कुमार "11/08/16
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