Tuesday, 9 August 2016

काल की डाल पर ,,,,घौंसले बनाने थे !
दरदरे जख्मों पर,,,,,, मरहम लगाने थे !!

रफ्तार तेज रही ,,,,हयात ए सफर की ,
एक वक्त में उम्र के ,,,,,पुष्प खिलाने थे !

आसमां में आफत ,धरती पे कहर था ,
दलदली राहों पर दो,,,,,, पैर जमाने थे !

साहिल के बीच भँवर का साथ मिला ,
सदियों के बिछड़े दिन रात मिलाने थे !

हाथ जल चुके थे,,,,,,,,,, होम लगाने में ,
जिम्मेदारियों के चप्पू ,,,, तो चलाने थे !

जय पराजय का साथ रहा जिंदगी भर ,
हाथों में भाले लिए ,,,,,,, खड़े जमाने थे !!

"जय कुमार"10/08/15

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