सबको बस दो गुलाबी , हजार की चाहत है नाम अपना हो जाय , इस्तिहार की चाहत है रंग बदलते ऐसे बदलती वेश्या चादरें सब बिकने तैयार है , बाजार की चाहत है
"जय कुमार"
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