बात छेड़कर जात धरम की , रोज बखेड़ा करते है भाई चारा तहजीबों की , जड़े उखेड़ा करते है जाने वो क्या देश धरम को , पोषक है जो नफरत के जिंदा करके वो मुर्दो को , घाव उदेड़ा करते है
"जय कुमार"
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