हर पल के साथ आईना ,
चेहरे बदलता रहा ।
साँस चलती रही काल ,
उम्र निगलता रहा ।
रिश्ते नाते समाज के बँध
बाँधते रहे मुझको ,
कदम बड़े आगे भ्रम था ,
मैं पीछे फिसलता रहा ।।
चेहरे बदलता रहा ।
साँस चलती रही काल ,
उम्र निगलता रहा ।
रिश्ते नाते समाज के बँध
बाँधते रहे मुझको ,
कदम बड़े आगे भ्रम था ,
मैं पीछे फिसलता रहा ।।
"जय कुमार"8/11/14
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