खाके मुफ्त को वे माल , फूल गये है गाल ।
उखाड़े बाल की खाल , बदल गई है चाल ।।
बदल गई है चाल , पेट बाहर को आवे ।
मुख पे कटू मुस्कान , देश के नेता कहावे ।।
उखाड़े बाल की खाल , बदल गई है चाल ।।
बदल गई है चाल , पेट बाहर को आवे ।
मुख पे कटू मुस्कान , देश के नेता कहावे ।।
"जय कुमार"9/11/14
No comments:
Post a Comment