गिरफ्त ख्यालों को करले ऐसा प्यार मत करना ।
समझे न जज्वात तेरे उससे इजहार मत करना ।
हिज्र की आग देकर गया ,रहता रकीब के साथ ,
समझे न जज्वात तेरे उससे इजहार मत करना ।
हिज्र की आग देकर गया ,रहता रकीब के साथ ,
उस बेमुरब्बत यार का अब इंतजार मत करना ।
"जय कुमार"
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