बाल खेलता
जवानी सोती रही
रोया बुढ़ापा
लाया जो गया
पाया जो था खो गया
दीवाना रोया
आज की कल
मुलाकात करते
निकला वक्त
मलाल कैंसा
खयाल ही रहा था
सत्य से परे
रब को ढ़ूँडा
जग में विचरण
मन की वस्तु
गगन धरा
मध्य जीवन चला
अनन्त काल
"जय कुमार"3/11/14
पाया जो था खो गया
दीवाना रोया
आज की कल
मुलाकात करते
निकला वक्त
मलाल कैंसा
खयाल ही रहा था
सत्य से परे
रब को ढ़ूँडा
जग में विचरण
मन की वस्तु
गगन धरा
मध्य जीवन चला
अनन्त काल
"जय कुमार"3/11/14
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