बेदर्द ज़माने में मेरा कैंसे बसर होगा।
राह निशान न बाँकी कैसे सफर होगा।
उजड़ गया घरौंदा आँधियो के दौर में ,
ए खुदा कहीं तो तेरा भी इक घर होगा ।।
"जय कुमार " ६/११/१४
राह निशान न बाँकी कैसे सफर होगा।
उजड़ गया घरौंदा आँधियो के दौर में ,
ए खुदा कहीं तो तेरा भी इक घर होगा ।।
"जय कुमार " ६/११/१४
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