Sunday, 29 March 2015

कड़ी धूप में भी


'उलझे सवालों में जबाब ढूँढता हूँ ।
मुरझाये फूलों में शबाब ढूँढता हूँ ।।

"जय कुमार"'
कड़ी धूप में भी वेहद चला था ।
वो आदमी भला था . . .
वो आदमी भला था ।।
भूख की आग सँजोकर ।
आँखे खून से भिगोकर ।
पसीने में नहाकर के वो ,
किसी काज से मिला था ।।
वो आदमी भला था . . .
रक्त को पसीना बनाया ।
रिश्तो को जीना बनाया ।
पैरों में फफोले थे पाऊड़ी
वक्त की धार पे चला था ।
वो आदमी भला था . . .
चितड़े लपेटे हुए तन था ।
उज्जवल पवित्र मन था ।
मुख पर चंद्र सा तेज लिए ,
उसे जमाने से न गिला था ।।
वो आदमी भला था . . .
जन्म से हाथों में कुदाल थी।
जीवन नचाती वो चाल थी ।
भीख रहम से नफरत उसे ,
मेहनत के साये में पला था ।
वो आदमी भला था . . .
कड़ी धूप में भी वेहद चला था ।
वो आदमी भला था . . . !!
"जय कुमार" 27/02/15

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