Sunday, 29 March 2015

उसके दामन

उसके दामन को लहुलुहान किया ,
मेरे दामन पर भी दाग लगे होगे ।
सोया नहीं इबादत की रात थी ,
सोये खुदा शायद अब जगे होगे ।
गया जो आया ना लौटकर कभी ,
सच फरमाया जन्नत में मजे होगे ।
वेवक्त सोया कफन नसीब नहीं ,
मुफलिसी के मर्ज फिर सजे होगे ।
तूफान आया उड़ गई तेरी हस्ती ,
उँगली उठाने वाले भी सगे होगे ।
अँधेरों में रहा शहनाई सुन अपनी ,
सोचता गैर के घर बाजे बजे होगे ।
"जय कुमार"8/1/15

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