राज वो सारे अब अनजान ना रहे ।
फलित हो ऐसे अब वरदान न रहे ।।
मुर्दो की भीड़ दिखती रोज राहों पर ,
क्या शहर में अब शमशान ना रहे ।।
क्या शहर में अब शमशान ना रहे ।।
खाली खाली दिखता हर दिल आज ,
दिल पे करें राज वो मेहमान न रहे ।।
दिल पे करें राज वो मेहमान न रहे ।।
सर्द हवाओं ने दस्तक दी आज फिर ,
गर्म मौसम के जय कद्रदान ना रहे ।।
गर्म मौसम के जय कद्रदान ना रहे ।।
"जय कुमार"27/02/15
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