Mere Bhav
Monday, 30 March 2015
हर वन्दा मुकम्मल
हर वन्दा मुकम्मल अगर हो जाता ।
वस तेरी ही मुहब्बत में खो जाता ।
आफताफ की आग कौन जलता यहाँ ,
चाँद के आगोश में अगर सो जाता ।।
"जय कुमार"24/03/15
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment