Sunday, 29 March 2015

चाँद छुप गया घनेरे

चाँद छुप गया घनेरे बादलों में इस तरह ।
किसी बच्चे को रुला दिया हो जिस तरह ।।
बैखोफ घूमने लगे खंजर शहर की राहों में ,
मिल गया हो घासलेट पानी में जिस तरह ।।
तोड़ने वाले ने ऐसा तोड़ा मेरी रुह को यार ,
काँच बिखरा पड़ा हो राह में जिस तरह ।।
जय रोज की पराजय ना झेल सका यारो ,
मिला मिट्टी में मिलती खाख जिस तरह ।।
"जय कुमार"25/02/15

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