धरती की कहानी आसमान सुनाने लगता है | जीत लेता खुदको खार पुष्प खिलाने लगता है | समुंदर को दे चुनौती खड़ा रहता हूँ राहों पर | लहरें हार जाती हैं साहिल बुलाने लगता है ||
"जय कुमार"
No comments:
Post a Comment