आँखों की शरमाई देखी
होंठो की नरमाई देखी
लुटने वाले लुटते रहते
वांहों की गरमाई देखी
गोरे बदन की गोरी मिले
कारों की भरमाई देखी
भंवर कुमुदनी पे मचलता
फूलों की कुमलाई देखी
जंगल सी शहरों की राहें
कली कली मुरझाई देखी
"जय कुमार"
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