Saturday, 24 September 2016

कछु  तबाही  तुमने  देखी
कछु  तबाही  हमने  देखी
फिर भी चैन  परत  नईंया
नौने   काम  करत  नईंया

सैंतालीस  के  जख्मों  खों
जले  मुर्दो  की  भस्मों खों
उन्हे  उखाड़ दर्द बड़ा रव
ऐसेअडुआ खूब अड़ा रव

पाछे की तें  काय पड़त हे
आंगे   काय  बड़त  नईंया

नौने   काम   करत  नईंया
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कुण्डलवन की घाटी मोरी
महादेव   की   माटी  मोरी
उलटी गंगा काय बहा रव
लहु से हमरे खूब नहा रव

पाक  नाव  कैने  रख  दव
नाव पे खरो उतरत नईंया

नौने   काम  करत  नईंया

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गीदड़ की है जात  तुमारी
हमसे भिड़हो मात तुमारी
सोय शेर खां तें  जगा  रव
आफत बैठे काय बुला रव

रगड़त  हम  तोखां ऐंसे हैं
भगतन गैल मिलत नईंया

नौने  काम   करत   नईंया
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कछु  तबाही  तुमने   देखी
कछु  तबाही  हमने   देखी
फिर भी चैन  परत  नईंया
नौने  काम   करत   नईंया

"जय कुमार "२४/०९/१६


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