सादर नमन काव्यमित्र परिवार चौपई छंद में मेरा पहला प्रयास आप सबकी समालोचना के लिए सादर प्रणाम के साथ
घर में लगती हो जब आग कैंसे गाने बैठे फाग सोने बाला तू अब जाग सरहद पर बैठा है नाग
"जय कुमार "
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