Thursday, 15 September 2016

सादर नमन काव्यमित्र परिवार
चौपई छंद में मेरा पहला प्रयास
आप सबकी समालोचना के लिए
सादर प्रणाम के साथ

घर में लगती हो जब आग
कैंसे     गाने     बैठे    फाग
सोने  बाला  तू  अब  जाग
सरहद  पर   बैठा  है  नाग

"जय कुमार "

No comments:

Post a Comment