मर मिटते वतन के लिए
चल बसते चमन के लिए
मसलने का समय सही
बात न हो अमन के लए
सियासत में बस निंदा है
हर भारतीय शर्मिंदा है
लाश बेटो की देखकर
मर गया पिता जो जिंदा है
कल आज कुछ दिखता नहीं
हर दिन झूठ बिकता नहीं
रेत पर रकीले खींचते
पत्थर पर क्यों लिखता नहीं
"जय कुमार "
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