अनजाने शहर में अनजाना सफर है ।
किसे ढ़ूँढ़ती आँखे वेगाना वेखबर है ।
तन्हाई का आलम .... तन्हा हर कोई ,
रास्ते शोर से भरे गुमसुम नजर है ।।
किसे ढ़ूँढ़ती आँखे वेगाना वेखबर है ।
तन्हाई का आलम .... तन्हा हर कोई ,
रास्ते शोर से भरे गुमसुम नजर है ।।
"जय कुमार"14/06/15
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