पीठ तहुलुहान हुई ये दोस्तों का प्यार है ।
छाती अभी साबत दुश्मन का इंतजार है ।
भरोसे वफा की इस खूबसूरत आदत में ,
फूल मुरझाये है अब जख्मों की बहार है ।।
छाती अभी साबत दुश्मन का इंतजार है ।
भरोसे वफा की इस खूबसूरत आदत में ,
फूल मुरझाये है अब जख्मों की बहार है ।।
"जय कुमार"२८/०६/१५
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