मासूम ख्वाबों का खूबसूरत जमाना था ।
बचपन हँसता हरेक गम से बेगाना था ।।
बचपन हँसता हरेक गम से बेगाना था ।।
गाय के संग वो दूर तलक भागकर जाना ।
यारों के संग वो बेर अमरुद को खाना ।
मटर खाते थे खेतों में चोरी से चुनके ,
बचपन मौज मस्ती का महकता खजाना था ।।
यारों के संग वो बेर अमरुद को खाना ।
मटर खाते थे खेतों में चोरी से चुनके ,
बचपन मौज मस्ती का महकता खजाना था ।।
बावड़ी के पानी में वो कूदकर उछलना ।
टीलों पे चढ़कर रपट रपट कर खिसकना ।
कपड़े की गेंद व लकड़ी का गिल्ली डंडा ,
बचपन खिलखिलाते खेलों का दीवाना था ।।
टीलों पे चढ़कर रपट रपट कर खिसकना ।
कपड़े की गेंद व लकड़ी का गिल्ली डंडा ,
बचपन खिलखिलाते खेलों का दीवाना था ।।
बहिन को चिड़ाना बड़े भैया को छकाना ।
दादी की लाठी पर दादू का जब हँसना ।
माँ की मीठी फटकार बापु का लाड़ प्यार ,
बचपन अनचुने खिले फूलों का अफसाना था ।।
दादी की लाठी पर दादू का जब हँसना ।
माँ की मीठी फटकार बापु का लाड़ प्यार ,
बचपन अनचुने खिले फूलों का अफसाना था ।।
"जय कुमार"
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