वो मुहब्बत की कहानी सी लगती है ।
वो आती रंगीन जवानी सी लगती है ।
वो आती रंगीन जवानी सी लगती है ।
घूँघट में छुपा चेहरा देखता उसका ,
वो गाती सुबह सुहानी सी लगती है ।
वो गाती सुबह सुहानी सी लगती है ।
प्यार में ये जमाना नामुराद क्या हुआ ,
वो चढ़ती शराब पुरानी सी लगती है ।
वो चढ़ती शराब पुरानी सी लगती है ।
खुशबु बिखर जाती राह में चलने से ,
रुखे चेहरों पर रवानी सी लगती है ।
रुखे चेहरों पर रवानी सी लगती है ।
मौसम बदलते इक इशारे पर उसके ,
कुदरत उसपे दीवानी सी लगती है ।।
कुदरत उसपे दीवानी सी लगती है ।।
"जय कुमार"12/6/15
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