जज्बात प्यार के मचल जाते है ।
वेहया होकर वो निकल जाते है ।
वेहया होकर वो निकल जाते है ।
नाजुक दिल मेँ छुपे हैं अरमान जो ,
बेरहम होकर वो कुचल जाते है ।
बेरहम होकर वो कुचल जाते है ।
शाम सूनी सुबह की आस करती ,
पहर इक आस में निकल जाते है ।
पहर इक आस में निकल जाते है ।
सर मुड़ाया एक अरसे बाद मैने ,
आसमाँ के जमे जल पिघल जाते है ।
आसमाँ के जमे जल पिघल जाते है ।
"जय कुमार"22/06/15
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