Tuesday, 9 June 2015

लाज शरम सबई


लाज शरम सबई भूल कें
अपनो खेरो घरई भूल कें
ईलु ईलु गाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
लरकोरी जा तोरी उमरिया
देख देख के पतरी कमरिया
भैया बंशी बजाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
खबर सबर तो छोड़ छाड़ कें
चिट्रटी चिठ्रठा फोड़ फाड़ कें
मोबाइल पे बतयाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
भैया गये पड़न खो काँलेज
सिगरट को हो गयो नाँलेज
दवाकें पाऊच चबाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
बी ई कर लई डिग्री ले लई
फीस ने दद्दा कि जानईं ले लई
खेत में बखर अब चलाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
ये की जोरी ओकी जोरी
ठलुओं के संग कुठियाँ फोरीं
चौंतरा पे बतयाऊँ लगे ।
लरका उजारे जाऊँ लगे ।।
"जय कुमार" 31-05-15

No comments:

Post a Comment