Monday, 8 June 2015

कछु हमाई


कछु हमाई भी सुन लईओ
कछु तुमाई भी सुन लेहें
अपनी अपनी चलईओ ने ।
बिना राग के गईओँ ने ।।
बिना राग के गईओ ने . . !
एक जगाँ हम बैठे नईयाँ
मुलक भरे में घूमत भैयाँ
हमकों कछु पड़ईओं ने ।
बिना राग के गईओं ने ।।
बिना राग के गईओं ने . . !
अपनों मान संग में रखिओ
उल्टी पुल्टी एक न बकिओ
जोन घरे पानी ने मिलवे
ओके घरे तुम जईओं ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
बिना राग के गईओ ने . . !
चार रुपया तोरे हो गये
ये जमाने में तुम खो गये
जो तो आवत जावत रेत है ,
ये पे तुम इठलईओ ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
बिना राग के गईयों ने . . !
बऊ दद्दा की सेवा करने
सबेरे सँझे राम खो भजने
जो तन तोरो जेने बनाओ
ओखो कबऊँ भुलईओ ने ।
बिना राग के गईओ ने ।।
बिना राग के गईओ ने . . !
"जय कुमार"28/05/15

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