Thursday, 10 August 2017

बीच  राह  पर  दंगल   होते
लोग शहर  के  आपा  खोते

कोई  लुटता  कोई   पिटता 
कानूनी      रखवाले    सोते

झुलझ गया दामन फूलों से 
अंगारों   की   फसलें   बोते 

शहर  जल जायेगा जालिम
मासूम  लोग आँख  भिगोते

मंजर  मौत  के  मन में  बैठे
अमन  चैन   कोने   में  रोते

मुफलिसी  में   लुटा  घरौंदा
जय बिखरे फूलों को पिरोते 

"जय कुमार"9/08/15

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