बीच राह पर दंगल होते
लोग शहर के आपा खोते
कोई लुटता कोई पिटता
कानूनी रखवाले सोते
झुलझ गया दामन फूलों से
अंगारों की फसलें बोते
शहर जल जायेगा जालिम
मासूम लोग आँख भिगोते
मंजर मौत के मन में बैठे
अमन चैन कोने में रोते
मुफलिसी में लुटा घरौंदा
जय बिखरे फूलों को पिरोते
"जय कुमार"9/08/15
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