Friday, 18 August 2017

रिश्तों की डोर  कच्ची  हो चली है !
घर  की  दीवार पक्की  हो चली है !
गांव  के  स्वर्ग  को  छोड़कर  भागे ,
शहर की दुनिया सच्ची हो चली है !!

"जय कुमार"

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