एक प्रयास _/\_ . .
गीत गजलों की भाषा हूँ ।
दर्द मजलूम का गाता हूँ ।
आँसू सूख गये आंखों से ,
उनका मैं मर्ज सुनाता हूँ ।
बिछोना है धरती जिनकी ,
उनके मैं बीच पाता हूँ ।
गीत शहनाई के न आते ,
मजबूरी मन की सुनाता हूँ ।
घोर निराशा के अंधेरों में ,
एक आशा दीप जलाता हूँ ।
जिन्हे जमाने ने धुतकारा ,
मैं उनको गले लगाता हूँ ।
वतन पर जो जान लुटायें ,
मैं उनको शीश झुकाता हूँ ।
कदम मिलाकर ही चलने में ,
मैं जय विश्वास जताता हूँ।
"जय कुमार"
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