Saturday, 12 August 2017

पीड़ा

हमारे क्रांतिकारी, हमारे नये भारत के जनक, हमारी धरोहर , विश्व के गौरव, जिनकी आत्म शक्ति का लोहा दुनिया ने माना व अनुशरण किया, जिनने अपना जीवन देशवासियों के भविष्य के लिए खपा दिया, उनके अनगिनत नाम है मुख्य नाम मंगल पांडे , झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, राष्ट पिता महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, लाला लजपत राय, लोकमान्य तिलक , चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, बी आर अंबेडकर, लाल बहादुर शास्त्री, जवाहर लाल नेहरू इत्यादि !!

हमारे देश को एक नई दशा व दिशा देने में इन व इन जैसे हजारों महापुरूषों ने अपना योगदान दिया हम इनके योगदान की बदौलत हम आज नई पहचान बनाने में कामयाब रहे है !!

हमारी आजादी के ७० साल हो चले है शुरूवात से हमने अपने महापुरूषों के योगदान को समझा सम्मान दिया !

लेकिन समय के साथ धीरे धीरे महापुरूषों को बांटने का काम होता रहा हमने अपने अपने आदर्श पुरूष बना लिए बांट लिए, यहां तक भी कोई बात नहीं, बंटे हुए इन लोंगो ने महापुरूषों की निंदा शुरू कर दी, कोई किसी को श्रेष्ठ मानने लगा, कोई किसी को, आम लोगो के बीच बदनाम किया गया,  राजनैतिक पायदे के लिए यह सब चलता रहा ! कुछ महापुरूषों के निर्णयों पर आये दिन सवाल किये जाते रहे है , आज खुले आम सोशल मीडिया पर हमारे नायको को बिना तथ्य के बदनाम किया जाता है  हर दिन आपको जहर उगलने बाली बाते मिलेगी !!खुलेआम अपशब्दों का प्रयोग किया जाता है जो पीड़ादायक है !!!!

इन नायको के रास्ते अलग रहे होगे, लेकिन नियत सबकी एक ही थी मंजिल सबकी एक ही थी , उस वक्त के हालातों के अनुसार उन्होंन उचित निर्णय लिए हमें यह समझना होगा !!

हमारे ही महापुरूषों का हम ही अपमान करें जिन्हे संसार प्रेरणा का स्त्रोत मानता है यह कहां तक उचित है ??

"जय कुमार"

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