कौन कहता वक्त हर जख्म भर देता
मेरे दिल के जख्म हरे के हरे रहे
सूख जाता होगा समुंदर तेज धूप में
मेरी आंखों में अश्क भरे के भरे रहे
कागज और स्याही धमाल करते रहे
धरातल पर सारे वादे धरे के धरे रहे
जिंदा करते रहे वादे ख्वाहिशों को
वफाओं के आलम मरे के मरे रहे
अमन चैन की बातें बज्म में बैठकर
घर के अंदर मासूम डरे के डरे रहे
"जय कुमार "
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