दिल्ली के दरबारों का सच क्यों कोई लिखता नहीं सत्तर बर्ष के बूढे सपने सत्य तुमे दिखता नहीं वादे और इरादे इनके लगते नदी के दो साहिल पैकिंग चाहे सुंदर करलो सदियों झूठ छिपता नहीं
"जय कुमार "
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