अपने गमोँ को छुपाकर तो देखा होता ।
ओरो पर फिदा होकर तो देखा होता ।
कितना सुकून मिलता है जह्न को मित्रो ,
किसी को खुशी देकर तो देखा होता ।।
तपकर के ओरो को प्रकाश दिया होता ।
गमोँ के हलाहल को खुशी से पिया होता ।
नम आँखो से विदा जमाना करता है ,
मुझे तूने हँसकर तो विदा किया होता ।।
"जय कुमार" 05/12/2013
ओरो पर फिदा होकर तो देखा होता ।
कितना सुकून मिलता है जह्न को मित्रो ,
किसी को खुशी देकर तो देखा होता ।।
तपकर के ओरो को प्रकाश दिया होता ।
गमोँ के हलाहल को खुशी से पिया होता ।
नम आँखो से विदा जमाना करता है ,
मुझे तूने हँसकर तो विदा किया होता ।।
"जय कुमार" 05/12/2013
No comments:
Post a Comment