अबे कछु नई बिगड़ो अबे सबई सम्हल जाए रे ।
काय फसोँ आफत मेँ तै राम राम काये ने गाए रे ।
रातई दिन ते माया जोड़े कर कर उलटे काम ,
तोरो जो महर अटरिया कोनऊ संगे ने जाए रे ।
कछु करम तो अब तै नोने करले मूरख मानस ,
जो लोक सुधर जेहे भैया वो भी सुधर जाए रे ।
कोनऊ की काये ते सुन रओ अपने मन की सुन ,
जो जंजाल तो चलो आरओ काये देखन जाए रे ।
मेला लगो सदियोँ से पंछी को ऐसई पसायेँ ,
अब राम सहारो लेईके पिँजरा से उड़ो जाए रे ।
"जय कुमार" 03/12/2013
काय फसोँ आफत मेँ तै राम राम काये ने गाए रे ।
रातई दिन ते माया जोड़े कर कर उलटे काम ,
तोरो जो महर अटरिया कोनऊ संगे ने जाए रे ।
कछु करम तो अब तै नोने करले मूरख मानस ,
जो लोक सुधर जेहे भैया वो भी सुधर जाए रे ।
कोनऊ की काये ते सुन रओ अपने मन की सुन ,
जो जंजाल तो चलो आरओ काये देखन जाए रे ।
मेला लगो सदियोँ से पंछी को ऐसई पसायेँ ,
अब राम सहारो लेईके पिँजरा से उड़ो जाए रे ।
"जय कुमार" 03/12/2013
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