Sunday, 29 December 2013

आसियाने बना लिए

पंछी ने उड़कर नये आसियाने बना लिए।
उसने मुजको छोड़ नये फ़साने बना लिए। 

कल  से ऊब गया होगा सायद ये आदमी ,        
तब तो उसने अपने नये ज़माने बना लिये। 

मेरी सौबत उसको रास ना आई होगी शायद ,
तब तो उसने और कई नये घराने बना लिए। 

मेरी मुहब्बत में कमी रह गई होगी शायद ,
इसलिए उसने अपने नए दीवाने बना लिए। 

धुंदला पड़ गया होगा शायद अब मेरा चेहरा ,
तब तो उसने अपने नये आईने बना लिये। 

"जय कुमार "
  


  

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