पंछी ने उड़कर नये आसियाने बना लिए।
उसने मुजको छोड़ नये फ़साने बना लिए।
कल से ऊब गया होगा सायद ये आदमी ,
तब तो उसने अपने नये ज़माने बना लिये।
मेरी सौबत उसको रास ना आई होगी शायद ,
तब तो उसने और कई नये घराने बना लिए।
मेरी मुहब्बत में कमी रह गई होगी शायद ,
इसलिए उसने अपने नए दीवाने बना लिए।
धुंदला पड़ गया होगा शायद अब मेरा चेहरा ,
तब तो उसने अपने नये आईने बना लिये।
"जय कुमार "
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