Sunday, 29 December 2013

जब तक जीवन ज्योति

जब तक जीवन ज्योति मेरे तन मेँ . . .
तेरा चेहरा वसा रहेगा मेरे मन मेँ . . .

मुझसे कब तक दूर रहेगा मेरे जीवन 
सूना पड़ा है तेरे बिन यह मेरा आँगन
आजा तू सब बंधन तोड़कर मेरे पास 
दोनो मिल गायेंगे मधुर गीत उपवन मेँ . .

बेहोस रहा बदहवास रहा जब तक 
तूने खूब साथ निभाया है तब तक 
अब खड़ा हुआ हूँ चलने को तेरे साथ 
तू अब ना देख पीछे अपने जीवन मेँ . . .

बक्त ने मुझको बहुत खूब समझाया 
तेरे प्रेम का हर पल अहसास दिलाया 
कर देँगेँ उस चीज को तौबा हम भी 
अब मुझको ना छोड़ जीवन वन मेँ . . .

हम साथ एक नया कारवाँ बनायेँगेँ 
अपने प्रेम की एक नई रीत चलायेँगेँ 
मेरे मन को तू पड़ लेना तेरे मन को हम
तब रुह एक हो जायेँगी इसी जीवन मेँ . . .

"जय कुमार"

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