Saturday, 28 December 2013

राजस्थान की भूमि

यह राजस्थान की भूमि ,
पालन करती वीरोँ का।  . . 
यहाँ पनपती है संस्कृति , 
जो सृजन करती हीरोँ का . . 


पग पग पर महल कोठरी , 
जन जन मेँ वसी वीरता , 
इतिहास अधूरा हो जायेगा , 
इस भूमि के वीरोँ के बिन , 
मरुभूमि वंदन करती वीरोँ का . . 


पृथ्वीराज से योध्दाओँ ने , 
इस धरा को खून से सीँचा था , 
राणा साँगा की वो तलवारेँ , 
अमर अमिट जीवन करती , 
लोहा लिया था जिनने , 
अन्याय की जंजीरोँ का . . . 

 
उस राजपूतानी पन्ना को , 
इतिहास भुला ना पायेगा , 
जब वलिदान की बात चलेगी  , 
पन्ना माँ का नाम दुहरायेगा , 
ममता का गला घोँटकर  , 
सामना किया वक्त की लकीरोँ का . . .


महाराणा प्रताप की भुजाओँ ने , 
अपनी हिम्मत दिखलाई थी , 
अकबर भी कांप उठा था , 
राज भक्त की भक्ति देख , 
मुगल सेना भी घबराई थी , 
झुकना जिसने उचित ना समझा ,  
भेष रखा था फकीरोँ का . . . 


यह राजस्थान की धरती , 
वीरोँ की जहाँ फसल उपजती , 
अभिनंदन करती वीरोँ का . . .
अभिनंदन करती वीरोँ का . . .
अभिनंदन करती वीरोँ का . . . 

"जय कुमार " १६/०९ /२०१३ 

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